UPI New Rules February 2026: UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। करोड़ों लोग रोजाना GPay, PhonePe, Paytm जैसे ऐप्स के जरिए ट्रांजैक्शन करते हैं। लेकिन 20 फरवरी 2026 से NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) द्वारा कुछ महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं। ये नए नियम UPI सिस्टम को और अधिक सुरक्षित, तेज और सुचारू बनाने के लिए लागू किए गए हैं।
इन नए नियमों का सीधा असर हर UPI यूजर पर पड़ेगा, चाहे वह आम नागरिक हो, दुकानदार हो या फ्रीलांसर। यदि आप भी नियमित रूप से UPI का इस्तेमाल करते हैं, तो इन बदलावों के बारे में जानना बेहद जरूरी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि 20 फरवरी 2026 से क्या-क्या बदलने वाला है और आपको किन बातों का ध्यान रखना होगा।
बैलेंस चेक करने पर लगेगी लिमिट
अब से UPI ऐप्स के जरिए आप एक दिन में सिर्फ 50 बार ही अपने बैंक अकाउंट का बैलेंस चेक कर पाएंगे। यह लिमिट प्रति ऐप के हिसाब से लागू होगी। मतलब अगर आपके फोन में दो अलग-अलग UPI ऐप्स हैं, तो दोनों से मिलाकर आप 100 बार बैलेंस चेक कर सकते हैं। यह नियम उन लोगों को प्रभावित कर सकता है जो बार-बार अपना बैलेंस चेक करने के आदी हैं।
NPCI ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि बार-बार बैलेंस चेक करने से बैंक सर्वर पर अनावश्यक लोड पड़ता था। इससे कभी-कभी ट्रांजैक्शन में देरी और फेल होने की समस्या आती थी। नई लिमिट से सिस्टम की परफॉर्मेंस बेहतर होगी और असली ट्रांजैक्शन तेजी से होंगे। इसलिए अब यूजर्स को बैलेंस चेक करने की आदत में सुधार करना होगा और जरूरत पड़ने पर ही इसका उपयोग करना होगा।
लिंक्ड बैंक अकाउंट देखने की भी सीमा तय
अब हर यूजर प्रति ऐप से केवल 25 बार ही अपने लिंक्ड बैंक अकाउंट की जानकारी देख सकेगा। यह लिमिट List Account API के माध्यम से लागू की गई है। पहले यूजर्स जितनी बार चाहें अपने लिंक्ड अकाउंट की डिटेल्स देख सकते थे, लेकिन अब इस पर रोक लग गई है। यह बदलाव भी बैंकिंग सिस्टम पर अनावश्यक दबाव कम करने के उद्देश्य से किया गया है।
कई बार यूजर्स गलती से या अनजाने में बार-बार अकाउंट लिस्ट को रिफ्रेश करते रहते हैं, जिससे सर्वर पर लोड बढ़ता है। नई लिमिट से यह समस्या कम होगी और सिस्टम स्मूथली काम करेगा। यदि आप कई बैंक अकाउंट्स को एक ही UPI ऐप से लिंक करते हैं, तो आपको इस नियम का विशेष ध्यान रखना होगा और बिना जरूरत के लिस्ट को बार-बार चेक करने से बचना होगा।
ऑटोपे ट्रांजैक्शन अब नॉन-पीक आवर्स में होंगे
यदि आप UPI ऑटोपे का इस्तेमाल करते हैं, जैसे कि सब्सक्रिप्शन पेमेंट, EMI, या बिल पेमेंट, तो अब ये ट्रांजैक्शन सिर्फ नॉन-पीक आवर्स में प्रोसेस होंगे। पीक आवर्स यानी वह समय जब सबसे ज्यादा लोग UPI का इस्तेमाल करते हैं। इस बदलाव का मकसद सर्वर पर लोड को बैलेंस करना है ताकि जरूरी ट्रांजैक्शन बिना किसी रुकावट के हो सकें।
साथ ही, हर ऑटोपे रिक्वेस्ट के लिए अब केवल 4 बार प्रोसेसिंग की जाएगी – 1 ओरिजिनल अटेम्प्ट और 3 रिट्राई अटेम्प्ट्स। पहले कभी-कभी एक ही पेमेंट बार-बार ट्राई होती रहती थी, जिससे सिस्टम में अनावश्यक ट्रैफिक बढ़ता था। नए नियम से ऑटोपे फेल होने की संभावना कम होगी और सफल ट्रांजैक्शन की दर बढ़ेगी। यूजर्स को अपने ऑटोपे अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस रखना चाहिए ताकि पहले ही प्रयास में पेमेंट सफल हो जाए।
इनएक्टिव UPI ID अपने आप डिसेबल हो जाएगी
अगर आपकी UPI ID पिछले 12 महीनों से इस्तेमाल में नहीं है, तो वह ऑटोमैटिक डिसेबल हो जाएगी। यह नियम सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। अक्सर लोग अपना मोबाइल नंबर बदल देते हैं और पुराना नंबर किसी और को मिल जाता है। ऐसे में यदि उस पुराने नंबर से जुड़ी UPI ID एक्टिव रहे, तो धोखाधड़ी का खतरा बढ़ जाता है।
इसलिए NPCI ने यह सुरक्षा उपाय लागू किया है कि 12 महीने तक बिना इस्तेमाल वाली UPI IDs खुद-ब-खुद बंद हो जाएंगी। यदि आप अपनी पुरानी UPI ID का फिर से इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो आपको उसे दोबारा एक्टिवेट करना होगा। यह प्रक्रिया आसान है और आप अपने UPI ऐप में जाकर इसे फिर से चालू कर सकते हैं। लेकिन यह ध्यान रखें कि रीएक्टिवेशन के लिए आपको वेरिफिकेशन से गुजरना होगा।
नया बैंक अकाउंट जोड़ने पर सख्त वेरिफिकेशन
UPI में नया बैंक अकाउंट लिंक करते समय अब पहले से ज्यादा सख्त वेरिफिकेशन और यूजर ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह बदलाव UPI धोखाधड़ी को रोकने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए किया गया है। पहले कई मामलों में देखा गया था कि साइबर अपराधी लोगों की जानकारी चुराकर उनके बैंक अकाउंट को अपने UPI ऐप से लिंक कर लेते थे।
अब नए नियमों के तहत, जब भी आप कोई नया अकाउंट जोड़ेंगे, तो आपको मल्टी-लेयर ऑथेंटिकेशन से गुजरना होगा। इसमें OTP वेरिफिकेशन, डेबिट कार्ड डिटेल्स, और कभी-कभी बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी शामिल हो सकता है। हालांकि यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है, लेकिन यह आपके पैसों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए जब भी नया अकाउंट लिंक करें, तो धैर्य रखें और सभी स्टेप्स सही तरीके से पूरे करें।
API रिस्पॉन्स टाइम में भारी कमी
UPI ट्रांजैक्शन को और भी तेज बनाने के लिए, अब किसी भी जरूरी ट्रांजैक्शन API का रिस्पॉन्स टाइम 10 सेकंड के अंदर ही मिलना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले यह समय सीमा 30 सेकंड थी, जो कभी-कभी पेमेंट में देरी का कारण बनती थी। नए नियम से अब ट्रांजैक्शन तीन गुना तेज होंगे और यूजर एक्सपीरियंस में काफी सुधार होगा।
यह बदलाव खासकर उन दुकानदारों और व्यापारियों के लिए फायदेमंद है जो दिन भर में सैकड़ों ट्रांजैक्शन करते हैं। तेज रिस्पॉन्स टाइम से कतार भी कम होगी और ग्राहकों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। साथ ही, यह रीयल-टाइम पेमेंट एक्सपीरियंस को और बेहतर बनाएगा। NPCI ने बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को निर्देश दिया है कि वे अपने सिस्टम अपग्रेड करें ताकि यह टारगेट हासिल हो सके।
UPI से क्रेडिट लाइन का इस्तेमाल होगा संभव
14 फरवरी 2026 के बाद यूजर्स UPI के माध्यम से बैंक या NBFC से मिली प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट लाइन से भी पेमेंट या पैसे निकाल सकेंगे। यह सुविधा उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी होगी जिन्हें समय-समय पर ओवरड्राफ्ट फंड्स की जरूरत पड़ती है। पहले क्रेडिट लाइन का इस्तेमाल सीमित तरीकों से ही हो पाता था, लेकिन अब UPI इंटीग्रेशन के साथ यह और आसान हो जाएगा।
इस फीचर का खास फायदा यह है कि आपको अलग से लोन एप्लीकेशन या क्रेडिट कार्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर आपके पास प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट लाइन है, तो आप सीधे अपने UPI ऐप से ही उसका इस्तेमाल कर सकेंगे। हालांकि, इस सुविधा का इस्तेमाल करते समय ब्याज दरों और चुकौती शर्तों को ध्यान से समझना जरूरी है। जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें और केवल जरूरत पड़ने पर ही क्रेडिट लाइन का सहारा लें।
नए नियमों के पीछे का मुख्य उद्देश्य
NPCI द्वारा लागू किए जा रहे इन सभी नए नियमों का मुख्य उद्देश्य UPI सिस्टम को और अधिक मजबूत, सुरक्षित और यूजर-फ्रेंडली बनाना है। सर्वर पर बढ़ते लोड को कंट्रोल करना, ट्रांजैक्शन फेल्योर की दर को कम करना, और सिस्टम में स्लो डाउन की समस्या को खत्म करना इन बदलावों के प्रमुख लक्ष्य हैं। इससे न केवल यूजर्स को बेहतर सेवा मिलेगी बल्कि बैंकों को भी अपने सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने में मदद मिलेगी।
नई टेक्नोलॉजी और बेहतर सुरक्षा मानकों के साथ, ये नियम डिजिटल पेमेंट की दुनिया में भारत की अग्रणी स्थिति को और मजबूत करेंगे। करोड़ों लोग जो रोजाना UPI का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें अब तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा मिलेगी। इसके साथ ही, धोखाधड़ी के मामलों में भी कमी आएगी क्योंकि सख्त वेरिफिकेशन और इनएक्टिव ID डिसेबल जैसे कदम सुरक्षा को बढ़ावा देंगे।
नियमों का पालन न करने पर क्या होगा
NPCI ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि इन नए नियमों का पालन नहीं किया गया, तो UPI ऐप्स और बैंकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें API बैन, भारी पेनल्टी, और यहां तक कि UPI सर्विस प्रोवाइडर का लाइसेंस रद्द करना भी शामिल हो सकता है। इससे साफ है कि NPCI इन नियमों को लेकर कितना गंभीर है और वह डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करना चाहता।
यूजर्स के लिए भी यह जरूरी है कि वे इन नियमों को समझें और तदनुसार अपने ट्रांजैक्शन प्लान करें। खासकर दुकानदार, फ्रीलांसर, और वे लोग जो नियमित रूप से बड़ी संख्या में पेमेंट करते हैं, उन्हें इन बदलावों का विशेष ध्यान रखना होगा। बार-बार बैलेंस चेक करने की आदत छोड़ें, ऑटोपे के लिए पर्याप्त बैलेंस रखें, और नई लिमिट्स के भीतर ही काम करें ताकि कोई परेशानी न हो।
यूजर्स को क्या करना चाहिए
इन नए नियमों के लागू होने के बाद UPI यूजर्स को कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होगा। सबसे पहले, बेवजह बार-बार बैलेंस चेक करने से बचें और केवल जरूरत पड़ने पर ही इसका इस्तेमाल करें। अगर आप कई UPI ऐप्स इस्तेमाल करते हैं, तो सभी में बैलेंस चेक की लिमिट का ध्यान रखें। साथ ही, अपनी सभी UPI IDs को एक्टिव रखने के लिए हर कुछ महीनों में उनका इस्तेमाल जरूर करें ताकि वे डिसेबल न हों।
ऑटोपे यूजर्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके अकाउंट में हमेशा पर्याप्त बैलेंस हो ताकि पहली बार में ही पेमेंट सफल हो जाए। नया बैंक अकाउंट लिंक करते समय सभी वेरिफिकेशन स्टेप्स को ध्यान से पूरा करें और जल्दबाजी न करें। अगर आप क्रेडिट लाइन फीचर का इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं, तो पहले इसकी सभी शर्तें और ब्याज दरें समझ लें। इन सभी बातों का ध्यान रखकर आप नए UPI नियमों के साथ आसानी से तालमेल बिठा सकेंगे।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। UPI के नए नियमों की सटीक और नवीनतम जानकारी के लिए NPCI की आधिकारिक वेबसाइट या अपने बैंक से संपर्क करें। लेख में दी गई जानकारी समय के साथ बदल सकती है। किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।





