18k, 22k और 24 कैरेट सोने की भाव में आई बड़ी गिरावट लोगों में खुशी का माहौल। Gold Price Today

By: Olivia

On: February 13, 2026 9:39 PM

Gold Price Today

Gold Price Today: भारतीय बाजार में सोना हमेशा से निवेश और सुरक्षा का प्रमुख साधन रहा है। फरवरी 2026 में सोने की कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट देखने को मिली है, जिससे आम लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। 18 कैरेट, 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने के दामों में आई इस कमी ने ज्वेलरी खरीदारों और निवेशकों दोनों को राहत दी है। वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव, रुपये की स्थिति और घरेलू मांग जैसे कारकों ने इन कीमतों को प्रभावित किया है। यदि आप सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं या निवेश के बारे में सोच रहे हैं, तो यह समय बेहद अनुकूल साबित हो सकता है। इस लेख में हम आपको आज के सोने के भाव, गिरावट के कारण, विभिन्न शहरों में कीमतों का अंतर और खरीदारी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां विस्तार से बताएंगे।

सोने की कीमतों में गिरावट क्या है और क्या बदलाव हुआ है

हाल ही में भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। 24 कैरेट सोने की कीमत जो पहले प्रति 10 ग्राम ₹1,60,000 से ऊपर थी, वह अब ₹1,56,000 के आसपास आ गई है। इसी तरह 22 कैरेट सोने में भी प्रति 10 ग्राम लगभग ₹3,000 से ₹4,000 की कमी देखी गई है। यह गिरावट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दामों में नरमी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण आई है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी और केंद्रीय बैंकों की नीतियों में बदलाव ने भी इस गिरावट में योगदान दिया है। भारत में आयात शुल्क में किसी बदलाव न होने के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है और आने वाले त्योहारी सीजन में कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं।

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सोने के भाव में गिरावट से जुड़ी मुख्य बातें

सोने की कीमतों में आई इस गिरावट के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं जिन्हें समझना आवश्यक है। पहला और सबसे बड़ा कारण है अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग में कमी आना। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियों में स्थिरता आने से निवेशक अन्य विकल्पों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। दूसरा कारण है डॉलर इंडेक्स में मजबूती, जिसके कारण सोना महंगा हो जाता है और मांग घट जाती है। तीसरा महत्वपूर्ण पहलू है चीन और भारत जैसे प्रमुख सोना उपभोक्ता देशों में आयात में कमी। चौथा कारक है वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग घटी है। पांचवां कारण है तकनीकी कारकों और व्यापारियों की बिकवाली, जो शॉर्ट टर्म में कीमतों को प्रभावित करती है। इन सभी कारकों ने मिलकर भारतीय बाजार में सोने के दामों को नीचे लाने में अहम भूमिका निभाई है।

विभिन्न कैरेट के सोने के आज के भाव

भारतीय बाजार में सोने की शुद्धता के आधार पर कीमतें अलग-अलग होती हैं। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है और इसमें 99.9% सोना होता है। इसकी वर्तमान कीमत प्रति 10 ग्राम ₹1,56,000 से ₹1,58,000 के बीच है। यह मुख्य रूप से निवेश उद्देश्यों के लिए खरीदा जाता है, जैसे कि सोने के सिक्के या बार। 22 कैरेट सोना 91.6% शुद्ध होता है और इसका सबसे अधिक उपयोग आभूषण बनाने में होता है। इसकी कीमत ₹1,43,000 से ₹1,45,000 प्रति 10 ग्राम है। यह ज्वेलरी के लिए आदर्श माना जाता है क्योंकि इसमें मिश्र धातुओं की मौजूदगी इसे अधिक मजबूत बनाती है। 18 कैरेट सोने में 75% सोना होता है और यह हल्के आभूषण के लिए पसंद किया जाता है, इसकी कीमत ₹1,17,000 से ₹1,19,000 प्रति 10 ग्राम है। 14 कैरेट सोना जिसमें 58.3% सोना होता है, सबसे सस्ता विकल्प है और इसकी कीमत ₹91,000 से ₹93,000 प्रति 10 ग्राम है। यह डिजाइनर ज्वेलरी और दैनिक उपयोग के आभूषणों के लिए लोकप्रिय है।

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प्रमुख शहरों में सोने की कीमतों में अंतर

भारत के विभिन्न शहरों में सोने की कीमतें अलग-अलग होती हैं, जो स्थानीय करों, परिवहन लागत और मांग-आपूर्ति के आधार पर तय होती हैं। दिल्ली में 24 कैरेट सोना ₹1,57,500 प्रति 10 ग्राम पर उपलब्ध है, जबकि 22 कैरेट की कीमत ₹1,44,400 है। मुंबई में कीमतें थोड़ी अधिक हैं क्योंकि यह देश का प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र है। यहां 24 कैरेट सोना ₹1,58,200 और 22 कैरेट ₹1,45,000 प्रति 10 ग्राम मिल रहा है। चेन्नई में सोने की परंपरागत मांग अधिक होने के कारण कीमतें ₹1,56,800 (24K) और ₹1,43,700 (22K) हैं। कोलकाता में 24 कैरेट सोना ₹1,57,000 और 22 कैरेट ₹1,43,900 प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। बेंगलुरु में आईटी सेक्टर के विकास के साथ सोने की मांग बढ़ी है और यहां कीमतें ₹1,57,300 (24K) और ₹1,44,200 (22K) हैं। हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे और जयपुर जैसे अन्य शहरों में भी कीमतें इसी रेंज में हैं, लेकिन स्थानीय कर संरचना के कारण छोटे-मोटे अंतर देखने को मिलते हैं।

सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के मुख्य कारण

सोने की कीमतें कई वैश्विक और स्थानीय कारकों से प्रभावित होती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतें सीधे तौर पर भारतीय बाजार को प्रभावित करती हैं। जब विश्व बाजार में सोने के दाम बढ़ते हैं तो भारत में भी कीमतें बढ़ जाती हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि सोने का व्यापार डॉलर में होता है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना सस्ता हो जाता है और जब डॉलर कमजोर होता है तो सोने की कीमतें बढ़ जाती हैं। भारतीय रुपये की विनिमय दर भी प्रमुख कारक है। जब रुपया कमजोर होता है तो आयातित सोना महंगा हो जाता है और घरेलू कीमतें बढ़ जाती हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के समय निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे मांग और कीमतें बढ़ती हैं। केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां, विशेष रूप से ब्याज दरें, भी सोने की कीमतों को प्रभावित करती हैं। कम ब्याज दरें सोने को आकर्षक बनाती हैं जबकि उच्च दरें अन्य निवेश विकल्पों को बेहतर बनाती हैं। भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और संकट की स्थिति में सोने की मांग बढ़ जाती है। घरेलू मांग-आपूर्ति का संतुलन भी कीमतों को निर्धारित करता है, विशेष रूप से त्योहारी सीजन और शादी के मौसम में।

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सोने की कीमतों में गिरावट का आम लोगों पर असर

सोने की कीमतों में आई गिरावट का सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं को मिल रहा है। विवाह के लिए आभूषण खरीदने वाले परिवारों को काफी राहत मिली है क्योंकि अब वे कम कीमत पर अधिक सोना खरीद सकते हैं। एक परिवार जो 50 ग्राम सोना खरीदना चाहता है, वह गिरावट के कारण लगभग ₹1,50,000 से ₹2,00,000 तक बचा सकता है। निवेशकों के लिए यह समय बेहद अनुकूल है क्योंकि वे कम कीमत पर सोना खरीदकर भविष्य में बेहतर रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं। सोने के व्यापारी और ज्वेलर्स को भी फायदा हो रहा है क्योंकि कम कीमतों के कारण ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। त्योहारों से पहले यह गिरावट विशेष रूप से लाभदायक है क्योंकि लोग सस्ते दामों में खरीदारी करना चाहते हैं। मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है जो लंबे समय से सोना खरीदने की योजना बना रहे थे। हालांकि पहले से सोना रखने वाले निवेशकों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उनके निवेश का मूल्य घट गया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है और लंबी अवधि में सोना एक सुरक्षित निवेश बना रहेगा।

वर्तमान में सोना खरीदने के फायदे

वर्तमान परिस्थिति में सोना खरीदना कई दृष्टिकोणों से लाभदायक हो सकता है। सबसे पहला और स्पष्ट लाभ यह है कि कीमतें पिछले कुछ महीनों की तुलना में काफी कम हैं, जो खरीदारों को बेहतर मूल्य प्रदान करता है। निवेश की दृष्टि से देखें तो यह खरीदारी का उत्तम समय है क्योंकि भविष्य में कीमतें बढ़ने की संभावना है। त्योहारी सीजन आने वाला है जिसमें आमतौर पर सोने की मांग बढ़ती है और कीमतें भी ऊपर जाती हैं। विवाह के लिए आभूषण खरीदने वाले परिवार अभी खरीदकर काफी पैसे बचा सकते हैं। सोना एक सुरक्षित निवेश विकल्प है जो मुद्रास्फीति से बचाव प्रदान करता है और आर्थिक अनिश्चितता में स्थिरता देता है। डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं जो भौतिक सोने की तुलना में अधिक सुविधाजनक हैं। बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा गोल्ड लोन की सुविधा भी सोने को तरल संपत्ति बनाती है। विरासत और परिवार के लिए सोना खरीदना एक पारंपरिक और विश्वसनीय तरीका है संपत्ति को सुरक्षित रखने का।

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सोना खरीदते समय ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बातें

सोना खरीदते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। सबसे पहले आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप बीआईएस हॉलमार्क वाला सोना ही खरीद रहे हैं। हॉलमार्क सोने की शुद्धता की गारंटी होती है और इसमें 6 अंकों का यूनिक कोड होता है जिसे वेरिफाई किया जा सकता है। दूसरी महत्वपूर्ण बात है मेकिंग चार्जेस को समझना। ज्वेलर्स आमतौर पर सोने की कीमत के अलावा मेकिंग चार्जेस लेते हैं जो 6% से 25% तक हो सकते हैं। यह चार्ज डिजाइन की जटिलता पर निर्भर करता है। तीसरा महत्वपूर्ण पहलू है जीएसटी जो सोने पर 3% लगता है। इसे अंतिम कीमत में जोड़ा जाता है इसलिए बजट बनाते समय इसे ध्यान में रखें। चौथा, हमेशा विश्वसनीय और प्रमाणित ज्वेलर्स से ही खरीदारी करें। पांचवां, खरीदारी के बाद उचित बिल और प्रमाणपत्र जरूर लें। छठा, अलग-अलग दुकानों से रेट की तुलना करें क्योंकि मेकिंग चार्जेस में काफी अंतर हो सकता है। सातवां, यदि निवेश के लिए खरीद रहे हैं तो सिक्के या बार खरीदना बेहतर है क्योंकि इनमें मेकिंग चार्जेस नहीं लगते। आठवां, गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्पों पर भी विचार करें जो कभी-कभी अधिक लाभदायक होते हैं।

डिजिटल गोल्ड और पारंपरिक सोने में तुलना

आधुनिक युग में सोने में निवेश के कई विकल्प उपलब्ध हैं। पारंपरिक भौतिक सोना और डिजिटल गोल्ड दोनों की अपनी विशेषताएं हैं। भौतिक सोने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप इसे छू सकते हैं, आभूषण के रूप में पहन सकते हैं और सांस्कृतिक परंपराओं में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें भावनात्मक मूल्य भी जुड़ा होता है। लेकिन इसकी सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है और मेकिंग चार्जेस भी अतिरिक्त खर्च हैं। दूसरी ओर डिजिटल गोल्ड पूरी तरह ऑनलाइन खरीदा और बेचा जा सकता है। इसमें केवल 1 रुपये से भी निवेश शुरू किया जा सकता है। इसकी सुरक्षा की चिंता नहीं है और इसे कभी भी आसानी से बेचा जा सकता है। गोल्ड ईटीएफ शेयर बाजार में ट्रेड होते हैं और इनमें तरलता अधिक होती है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं जो 8 साल की परिपक्वता के साथ आते हैं और सालाना 2.5% ब्याज भी देते हैं। गोल्ड म्यूचुअल फंड भी एक विकल्प है जो गोल्ड ईटीएफ में निवेश करता है। प्रत्येक विकल्प की अपनी विशेषताएं और सीमाएं हैं इसलिए निवेशकों को अपने उद्देश्य के अनुसार चुनाव करना चाहिए।

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त्योहारी सीजन और सोने की खरीदारी

भारतीय संस्कृति में त्योहारों और शुभ अवसरों पर सोना खरीदने की परंपरा है। आने वाले महीनों में होली, अक्षय तृतीया, नवरात्रि और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार हैं जब सोने की खरीदारी शिखर पर होती है। इन अवसरों पर ज्वेलर्स विशेष छूट और ऑफर भी देते हैं। अक्षय तृतीया को सोना खरीदना विशेष रूप से शुभ माना जाता है और इस दिन खरीदारी में भारी वृद्धि देखी जाती है। विवाह का सीजन भी सोने की मांग को प्रभावित करता है। भारत में अप्रैल से जून और अक्टूबर से दिसंबर तक शादियों का मुख्य समय होता है। इन महीनों में आभूषणों की मांग बढ़ जाती है जिससे कीमतें भी प्रभावित होती हैं। वर्तमान में कीमतों में गिरावट को देखते हुए, त्योहारी सीजन से पहले खरीदारी करना बुद्धिमानी हो सकती है। इससे आप न केवल कम कीमत पर सोना खरीद सकते हैं बल्कि त्योहारों की भीड़भाड़ से भी बच सकते हैं। ज्वेलर्स भी इस अवधि में अपना स्टॉक बढ़ाते हैं और बेहतर विकल्प उपलब्ध कराते हैं।

सोने के निवेश में जोखिम और सावधानियां

यद्यपि सोना एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, फिर भी कुछ जोखिम और सावधानियां हैं जिनका ध्यान रखना चाहिए। पहला जोखिम है कीमतों में अस्थिरता। सोने की कीमतें वैश्विक कारकों से प्रभावित होती हैं और अचानक बढ़-घट सकती हैं। दूसरा जोखिम है मेकिंग चार्जेस और जीएसटी जो आभूषण खरीदते समय अतिरिक्त खर्च बढ़ा देते हैं। जब आप बेचते हैं तो मेकिंग चार्जेस वापस नहीं मिलते जिससे नुकसान हो सकता है। तीसरा जोखिम है शुद्धता की अनिश्चितता। हालांकि हॉलमार्क इसे कम करता है लेकिन फिर भी कुछ धोखाधड़ी के मामले सामने आते हैं। चौथा है भंडारण और सुरक्षा की समस्या। भौतिक सोना रखने के लिए सुरक्षित स्थान चाहिए और चोरी का खतरा भी रहता है। पांचवां है तरलता का मुद्दा। हालांकि सोना बेचना आसान है लेकिन कभी-कभी उचित मूल्य नहीं मिलता। छठा जोखिम है अवसर लागत। सोने में पड़ा पैसा अन्य निवेश विकल्पों में बेहतर रिटर्न दे सकता था। इन जोखिमों को कम करने के लिए विविधीकरण महत्वपूर्ण है और केवल सोने में ही सारा पैसा नहीं लगाना चाहिए।

भविष्य में सोने की कीमतों का अनुमान

विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में वर्तमान गिरावट अस्थायी है और आने वाले महीनों में कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं। कई कारक इस अनुमान का समर्थन करते हैं। पहला, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है और इसके बढ़ने पर सोने की मांग बढ़ेगी। दूसरा, केंद्रीय बैंक अभी भी सोना खरीद रहे हैं जो दीर्घकालिक मांग को मजबूत करता है। तीसरा, भू-राजनीतिक तनाव कभी भी बढ़ सकता है जो सोने को सुरक्षित विकल्प बना देगा। चौथा, मुद्रास्फीति की चिंताएं अभी भी मौजूद हैं जो सोने की मांग को बढ़ावा देती हैं। पांचवां, भारत में त्योहारी सीजन आने वाला है जो घरेलू मांग को बढ़ाएगा। कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 के अंत तक 24 कैरेट सोना ₹1,65,000 से ₹1,70,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। हालांकि यह अनुमान विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है और बदल सकता है। डॉलर की चाल, अमेरिकी फेड की नीतियां और वैश्विक आर्थिक स्थिति प्रमुख निर्धारक होंगे। निवेशकों को इन कारकों पर नजर रखनी चाहिए और अपनी निवेश रणनीति तदनुसार बनानी चाहिए।

सोने के विकल्प के रूप में अन्य कीमती धातुएं

सोने के अलावा अन्य कीमती धातुओं में भी निवेश किया जा सकता है जो पोर्टफोलियो विविधीकरण में मदद करती हैं। चांदी सबसे लोकप्रिय विकल्प है जो सोने से सस्ती होने के कारण छोटे निवेशकों के लिए उपयुक्त है। इसका औद्योगिक उपयोग भी अधिक है जो इसकी मांग को स्थिर रखता है। प्लैटिनम एक और कीमती धातु है जो ऑटोमोबाइल उद्योग में उपयोग होती है। यह सोने से भी महंगी हो सकती है और इसमें निवेश का विकल्प भी उपलब्ध है। पैलेडियम भी एक मूल्यवान धातु है जो इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो उद्योग में काम आती है। हालांकि ये धातुएं सोने की तुलना में अधिक अस्थिर हो सकती हैं। भारत में चांदी में निवेश आम है और इसे भी त्योहारों पर खरीदा जाता है। चांदी के सिक्के, बार और आभूषण सभी उपलब्ध हैं। डिजिटल रूप में भी चांदी ईटीएफ उपलब्ध हैं। निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता और निवेश उद्देश्य के अनुसार इन विकल्पों पर विचार करना चाहिए। कई विशेषज्ञ सोने और चांदी दोनों में निवेश करने की सलाह देते हैं ताकि जोखिम कम हो और बेहतर रिटर्न मिले।

सोने से जुड़ी सरकारी योजनाएं और नीतियां

भारत सरकार ने सोने के निवेश को प्रोत्साहित करने और नियमित करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम इनमें सबसे लोकप्रिय है जो रिजर्व बैंक द्वारा जारी की जाती है। इसमें निवेशक सोने की कीमत के बराबर बॉन्ड खरीदते हैं और 8 साल बाद परिपक्वता पर मूल्य प्राप्त करते हैं। इस पर सालाना 2.5% ब्याज भी मिलता है जो हर 6 महीने में दिया जाता है। गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत लोग अपना बेकार पड़ा सोना बैंकों में जमा कर सकते हैं और उस पर ब्याज कमा सकते हैं। हालांकि यह स्कीम उतनी सफल नहीं रही। हॉलमार्किंग अनिवार्य करके सरकार ने शुद्धता सुनिश्चित की है। 6 अंकों का यूनिक हॉलमार्क आइडेंटिफिकेशन नंबर धोखाधड़ी को कम करता है। सोने के आयात पर शुल्क नियंत्रण भी सरकार की महत्वपूर्ण नीति है। वर्तमान में सोने पर आयात शुल्क लगभग 15% है। पीएम जन धन योजना के तहत सोने के आभूषण पर लोन की सुविधा भी उपलब्ध है। पीएम किसान योजना के लाभार्थी भी सोने में निवेश कर सकते हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य सोने में पारदर्शिता लाना और इसे सुरक्षित निवेश बनाना है।

सोना खरीदने के लिए लोन और वित्तीय सहायता

यदि आपके पास सोना खरीदने के लिए पर्याप्त धन नहीं है तो कई वित्तीय विकल्प उपलब्ध हैं। बैंक और एनबीएफसी गोल्ड लोन प्रदान करते हैं जहां आप मौजूदा सोने को गिरवी रखकर पैसा ले सकते हैं। इस पैसे का उपयोग नया सोना खरीदने या अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकता है। गोल्ड लोन पर ब्याज दर आमतौर पर 7% से 12% के बीच होती है जो अन्य लोन से कम है। कुछ ज्वेलर्स किस्त योजना भी प्रदान करते हैं जिसमें आप मासिक किस्तों में भुगतान कर सकते हैं। डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म पर भी एसआईपी की सुविधा है जहां आप हर महीने छोटी राशि निवेश कर सकते हैं। क्रेडिट कार्ड से भी सोना खरीदा जा सकता है लेकिन इसमें ब्याज अधिक होता है। पर्सनल लोन भी एक विकल्प है लेकिन इसकी ब्याज दर गोल्ड लोन से अधिक होती है। कुछ बैंक विशेष गोल्ड परचेज स्कीम चलाते हैं जहां आप समय-समय पर जमा करते हैं और बाद में सोना खरीदते हैं। चिट फंड भी एक पारंपरिक तरीका है लेकिन इसमें जोखिम अधिक है। वित्तीय सलाहकारों से परामर्श करके सही विकल्प चुनना चाहिए।

सोने की सुरक्षा और भंडारण के उपाय

सोना खरीदने के बाद उसकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण चिंता है। घर में सोना रखते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। सबसे पहले एक अच्छी गुणवत्ता का तिजोरी या लॉकर घर में रखना चाहिए जो मजबूत हो और दीवार में फिक्स हो। सोने को कभी भी खुले में या आसानी से पहुंच वाली जगह नहीं रखना चाहिए। बैंक लॉकर एक बेहतर विकल्प है जो सुरक्षित और विश्वसनीय है। बैंक लॉकर की वार्षिक फीस ₹500 से ₹5000 के बीच होती है जो आकार पर निर्भर करती है। गृह बीमा में सोने को शामिल करना चाहिए ताकि चोरी या नुकसान की स्थिति में मुआवजा मिले। सोने के आभूषणों की तस्वीरें और बिल सुरक्षित रखने चाहिए। डिजिटल गोल्ड में यह समस्या नहीं है क्योंकि यह ऑनलाइन सुरक्षित रहता है। सोने को नियमित रूप से साफ करना और जांचना चाहिए। पुराने सोने को समय-समय पर पॉलिश करवाना चाहिए। घर में अधिक सोना न रखें और जरूरत से अधिक सोना बैंक लॉकर में रखें। सुरक्षा कैमरे और अलार्म सिस्टम भी लगाना चाहिए।

ऑनलाइन सोना खरीदने की प्रक्रिया और सावधानियां

आधुनिक युग में ऑनलाइन सोना खरीदना बेहद सुविधाजनक हो गया है। कई प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म और ज्वेलर्स ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करते हैं। ऑनलाइन खरीदारी के लिए पहला कदम है एक विश्वसनीय वेबसाइट या ऐप चुनना। टैनिश्क, मालाबार गोल्ड, पीसी ज्वेलर्स जैसे बड़े ब्रांड ऑनलाइन उपलब्ध हैं। डिजिटल गोल्ड के लिए पेटीएम, फोनपे, गूगल पे जैसे प्लेटफॉर्म हैं। वेबसाइट पर जाकर आप विभिन्न डिजाइन देख सकते हैं और कीमतों की तुलना कर सकते हैं। हॉलमार्क प्रमाणपत्र और शुद्धता की जानकारी जरूर जांचें। कस्टमर रिव्यू और रेटिंग पढ़ना महत्वपूर्ण है। ऑर्डर करने से पहले रिटर्न और एक्सचेंज पॉलिसी जरूर समझें। ऑनलाइन भुगतान सुरक्षित तरीके से करें और पेमेंट गेटवे की जांच करें। डिलीवरी के समय सोने की जांच करें और यदि कोई समस्या हो तो तुरंत शिकायत करें। बिल और प्रमाणपत्र सुरक्षित रखें। डिजिटल गोल्ड खरीदते समय प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता जांचें। कुछ प्लेटफॉर्म पर वापस खरीदने की गारंटी होती है जो अच्छा विकल्प है। ऑनलाइन खरीदारी में धैर्य रखें और जल्दबाजी न करें।

सोने के निवेश में कर और कानूनी पहलू

सोने में निवेश करते समय कर और कानूनी पहलुओं को समझना जरूरी है। सोने की खरीद पर 3% जीएसटी लागू होता है जो अंतिम कीमत में जोड़ा जाता है। यदि आप सोना बेचते हैं तो लाभ पर पूंजीगत लाभ कर लगता है। 3 साल से कम समय तक रखने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है जो आपके टैक्स स्लैब के अनुसार होता है। 3 साल से अधिक समय तक रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 20% इंडेक्सेशन के साथ लगता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में कुछ कर छूट हैं। यदि आप परिपक्वता तक रखते हैं तो कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता। गोल्ड ईटीएफ पर भी कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है। 2 लाख से अधिक मूल्य का सोना खरीदने पर पैन कार्ड देना अनिवार्य है। 10 लाख से अधिक नकद में सोना खरीदना अवैध है। विरासत में मिला सोना रखना कानूनी है लेकिन उचित दस्तावेज होने चाहिए। आयकर विभाग सोने की खरीद की जानकारी मांग सकता है इसलिए सभी बिल संभाल कर रखें। कर नियोजन के लिए वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना उचित है।

महिलाओं के लिए सोने का महत्व और निवेश

भारतीय समाज में सोना महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। यह न केवल आभूषण है बल्कि वित्तीय सुरक्षा का साधन भी है। पारंपरिक रूप से विवाह के समय महिलाओं को सोने के आभूषण दिए जाते हैं जो उनकी स्त्रीधन होता है। यह उनकी आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक है। महिलाएं सोने को बचत का एक सुरक्षित तरीका मानती हैं। संकट के समय सोने को बेचकर या गिरवी रखकर पैसे की व्यवस्था की जा सकती है। आधुनिक महिलाएं डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ में भी निवेश कर रही हैं। कई महिला केंद्रित सोने की योजनाएं उपलब्ध हैं जो विशेष लाभ प्रदान करती हैं। सोना महिलाओं को वित्तीय निर्णय लेने में सशक्त बनाता है। त्योहारों और शुभ अवसरों पर सोना खरीदना महिलाओं के लिए एक परंपरा है। करवा चौथ, तीज, दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों पर सोने की खरीदारी होती है। कामकाजी महिलाएं अपनी आय से नियमित रूप से सोना खरीदकर संपत्ति बना रही हैं। यह उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र और सुरक्षित बनाता है।

Disclaimer: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। सोने की कीमतें बाजार की स्थिति के अनुसार लगातार बदलती रहती हैं और यहां दी गई जानकारी लेखन के समय की है। वास्तविक कीमतें आपके शहर और ज्वेलर के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। किसी भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। सोना खरीदते समय हमेशा बीआईएस हॉलमार्क की जांच करें और विश्वसनीय विक्रेताओं से ही खरीदें। मेकिंग चार्जेस, जीएसटी और अन्य शुल्कों को ध्यान में रखकर ही बजट बनाएं। निवेश में जोखिम शामिल है और अतीत का प्रदर्शन भविष्य के परिणामों की गारंटी नहीं है। कर संबंधी मामलों के लिए कर विशेषज्ञ से सलाह लें क्योंकि कर नियम बदल सकते हैं। यह लेख किसी विशेष उत्पाद या सेवा का समर्थन नहीं करता। पाठकों से अनुरोध है कि वे अपने विवेक और आवश्यकता के अनुसार निर्णय लें।

Olivia Grace is a writer and editor at a leading news website. She covers government schemes, latest news, technology, and automobiles. Known for her clear and reliable writing, she focuses on delivering accurate and easy-to-understand information to readers.

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